कलेक्टर से लिखित शिकायत कर, निष्पक्ष जांच की मांग

*जांजगीर-चाम्पा।* जिला मुख्यालय से लगे ग्राम बनारी की राष्ट्रीय राजमार्ग-49 से लगी बेशकीमती शासकीय भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि वर्षों से शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज खसरा नंबर 2230/2, रकबा 2.00 एकड़ (0.809 हेक्टेयर) को नियमों के विपरीत निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। शिकायत में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन के अनुसार यह भूमि मिसल बंदोबस्त 1929-30, अधिकार अभिलेख 1954-55 तथा बाद के राजस्व अभिलेखों में लगातार शासकीय घास मद के रूप में दर्ज रही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में रिकॉर्ड दुरुस्ती के नाम पर इस जमीन को बोधराम पिता देवप्रसाद एवं अन्य, साथ ही मनोज पिता ताराचंद एवं अन्य के नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता अधिवक्ता रामखिलावन राठौर का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत हुई।आवेदन में उल्लेख किया गया है कि रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए वर्ष 2023 में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि लंबे समय तक मामला लंबित रहने के बाद वर्ष 2026 में अचानक रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया और कुछ ही समय बाद संबंधित भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी जमीन कारोबारियों को सौंप दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। शिकायतकर्ता ने आवेदन में हल्का पटवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पटवारी की पदस्थापना के बाद इस मामले में तेजी आई और वर्षों से लंबित प्रकरण अचानक सक्रिय हो गया। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि भूमि शासकीय थी तो बिना व्यापक प्रक्रिया और सार्वजनिक सूचना के रिकॉर्ड दुरुस्ती कैसे कर दी गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद प्रथम अपील भी दायर की गई। इसे भी शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को संदिग्ध बनाने वाला तथ्य बताया है। विदित हो कि यह मामला कलेक्टर के समक्ष पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता ने राजस्व अभिलेखों, रिकॉर्ड दुरुस्ती की पूरी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या रिकॉर्ड दुरुस्ती नियमों के अनुसार की गई है।
बढ़ा कारोबारियों का दखल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-49 से लगी जमीनों के दाम तेजी से बढ़ने के बाद जमीन कारोबारियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। अक्सर ऐसे कारोबारी उन्हीं जमीनों में रुचि दिखाते हैं, जहां स्वामित्व या राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद की स्थिति होती है। हालांकि, इस मामले में किसी भी व्यक्ति या कारोबारी की भूमिका की पुष्टि अभी जांच के बिना नहीं हुई है। यह स्थानीय स्तर पर व्यक्त की जा रही आशंका और शिकायतकर्ता के आरोप हैं.
तहसीलदार ने किया आरोपों को खारिज
मामलें के सम्बंध में जांजगीर तहसीलदार राजकुमार मरावी ने कहा कि रिकॉर्ड दुरुस्ती का आवेदन वर्ष 2023 में प्राप्त हुआ था। जांच में 1968-69 की नीलामी प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर बोधराम के दादा के पक्ष में भूमि का अधिकार पाया गया। उसी आधार पर रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया। तहसीलदार का कहना है कि शिकायतकर्ता के व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं और रिकॉर्ड दुरुस्ती नियमानुसार की गई है।
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