दुष्ट अजामिल को संतों की संगत से मिला मोक्ष – दुर्गेश महराज.

खोखरा । ग्राम खोखरा मे राठौर परिवार के यहाँ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा वाचक दुर्गेश महराज जी ने बताया कि अजामिल ब्राह्माण कुल में जन्मे थे और कर्मकाण्डी थे। एक दिन वह नर्तकी वेश्या कों अपने घर ले आए। एक दिन पच्चीस संतों का एक काफिला अजामिल के गांव से गुजर रहा था। यहां पर शाम हो गई तो संतों ने अजामिल के घर के सामने डेरा जमा दिया। अगले दिन साधुओं ने अजामिल से दक्षिणा मांगी। साधुओं ने कहा कि वह अपने होने वाले पुत्र का नाम तुम नारायण रख ले। बस यही हमारी दक्षिणा है। अजामिल की पत्‍‌नी को पुत्र पैदा हुआ तो अजामिल ने उसका नाम नारायण रख लिया और नारायण से प्रेम करने लगा। इसके बाद जब अजामिल का अंत समय आया तो यमदूतों को भगवान के दूतों के सामने अजामिल को छोड़ कर जाना पड़ गया। इस तरह अजामिल को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसलिए कहा गया है कि भगवान का नाम लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। कथा श्रवण के लिए आसपास के तमाम भक्त मौजूद रहे।

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