बिलासपुर।हत्या जैसे संगीन अपराधों में आरोपियों को शत-प्रतिशत सजा दिलाने और विवेचना की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग ने एक बड़ा कदम उठाया है। IG श्री गर्ग ने सोमवार 28 अप्रैल 2026 को रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों के लिए वर्चुअल माध्यम से विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया।
इस प्रशिक्षण में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल सहित ASP से लेकर उपनिरीक्षक रैंक तक के अधिकारी शामिल हुए। IG श्री गर्ग ने खुद प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए PPT के माध्यम से हत्या के प्रकरणों की विवेचना के बारीक पहलुओं को समझाया।
*’गिरफ्तारी नहीं, सजा है लक्ष्य’*
प्रशिक्षण के दौरान IG रामगोपाल गर्ग ने दो टूक कहा कि अब पुलिस का उद्देश्य सिर्फ आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट से सजा दिलवाना है। इसके लिए उन्होंने ‘स्मार्ट विवेचना’ नाम से विस्तृत कार्ययोजना और दिशा-निर्देश जारी किए।
अब से हत्या के हर प्रकरण में विवेचक को 124 बिंदुओं की एक विस्तृत चेकलिस्ट का पालन करना अनिवार्य होगा। FIR दर्ज होने से लेकर चार्जशीट पेश करने तक की हर प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का कोई फायदा न मिल सके।
*’स्मार्ट विवेचना’ के 6 बड़े बदलाव:*
1. *’ई-साक्ष्य’ से जप्ती अनिवार्य:* भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता BNSS की धारा 105 के तहत अब हर जप्ती की कार्रवाई ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी करते हुए की जाएगी। इससे साक्ष्य की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के बयान बदलने पर भी केस कमजोर नहीं होगा।
2. *क्राइम सीन का ‘गोल्डन ऑवर’ प्रबंधन:* घटनास्थल मिलते ही उसे तुरंत टेप लगाकर सील किया जाएगा। फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मौजूदगी के बिना साक्ष्य संकलन नहीं होगा। किसी भी साक्ष्य को बिना दस्ताने के छूने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
3. *डिजिटल फॉरेंसिक पर जोर:* विवेचक अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट खंगालेंगे। इसमें Google Takeout डेटा, इंटरनेट ब्राउजिंग हिस्ट्री और WhatsApp चैट लॉग्स शामिल हैं। साथ ही घटनास्थल के 100 KM के दायरे में लगे सभी CCTV कैमरों को ‘त्रिनयन ऐप’ से मैप किया जाएगा। फुटेज को सीधे DVR से जप्त कर भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4)(c) के प्रमाण पत्र के साथ केस डायरी में संलग्न किया जाएगा।
4. *DNA साक्ष्य बनेगा मुख्य हथियार:* मृतक के नाखूनों में फंसी आरोपी की स्किन, संघर्ष में टूटे बाल और कपड़ों पर मिले जैविक साक्ष्यों से DNA मिलान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इससे वैज्ञानिक तरीके से आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी साबित की जा सकेगी।
5. *रात में भी होगा पोस्टमार्टम:* भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अब संवेदनशील मामलों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था कर रात्रिकालीन पोस्टमार्टम भी कराया जा सकेगा। इसकी पूरी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। यदि PM रिपोर्ट में कोई अस्पष्टता रही तो डॉक्टर से FSL क्वेरी कराना अनिवार्य होगा।
6. *साक्ष्यों की ‘Chain of Custody’:* साक्ष्य को घटनास्थल से उठाने, थाने के मालखाने में रखने और FSL लैब भेजने तक की पल-पल की जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
*अप्रैल 2026 से सख्ती से लागू*
IG श्री गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अप्रैल 2026 के बाद घटित होने वाले सभी हत्या के प्रकरणों की विवेचना इन्हीं नए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रोटोकॉल के आधार पर होगी। CCTNS में एंट्री से लेकर CDR, IPDR और IMEI जैसे साइबर साक्ष्यों के संकलन तक पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि पुलिस अधिकारियों को नवीनतम अनुसंधान तकनीकों से अपडेट रखने के लिए अब हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर इसी तरह के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि विवेचना में कोई कमी न रह जाए और अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।