खाद की कालाबाजारी से निपटने एक सॉफ्टवेयर विकसित, किसानों की परेशानियों को देखते हुए कृषि विभाग की नयी पहल..

जांजगीर-चाम्पा। पीओएस मशीन आने के बाद ऐसा लगा था कि खाद की कालाबाजारी खत्म हो जाएगी। लेकिन खाद कोचियों ने नया रास्ता निकाल लिया। किसान के नाम पर खाद खरीदने का दावा करते हुए जमाखोरी की। जब किल्लत बढ़ी तो तीन गुना ज्यादा कीमत पर खाद बेची। पीओएस के बाद अब कृषि विभाग कालाबाजारी से निपटने के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो आगामी खरीफ सीजन से काम करेगा। अब किसान के फसल रकबे के अनुपात में ही खाद मिलेगी। सहकारी समितियों को अपडेट करने के लिए पैक्स योजना चलाई जा रही है इन समितियों में किसानों को लोन पर खाद मिलता है। यूरिया, डीएपी, पोटाश आदि उर्वरक लेने के लिए परेशानी भी होती है। अब उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी, सरल बनाने के लिए नई पहल की जा रही है। बताया जा रहा है कि नया डिजिटल एप सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। इस एप से आगामी खरीफ अभियान 2026-27 में उर्वरक वितरण किया जाएगा। केवल समिति के सदस्य किसानों को ही उनकी खेती के रकबे के अनुसार रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। सहकारी समितियों में सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है।

अब तक कोई दूसरा किसान भी नकद में खाद खरीद लेता था। एप से उर्वरक वितरण में रकबा आधारित आपूर्ति को फोकस किया जाएगा। इसके लिए एग्रीस्टेक पोर्टल को इस सॉफ्टवेयर से लिंक किया जाएगा। इसमें किसान का नाम, रकबा और उसकी बोई गई फसल भी दर्ज होगी। इसके अनुपात में स्वत: ही खाद की गणना कर ली जाएगी। फसल रकबा के अनुसार ही उर्वरक की मात्रा एप में नजर आएगी। उतना ही खाद किसान को दिया जा सकेगा।

ज्यादा उर्वरक नहीं ले सकेगा कोई

अभी समितियों में बिना पीओएस में दर्ज किए ही उर्वरक बेच दिया जाता है। खाद के स्टॉक की भी सही जानकारी नहीं मिलती। लेकिन अब समिति में उपलब्ध खाद का रियल टाइम डाटा दिखेगा। हर किसान को खाद देने के बाद स्वत: ही स्टॉक अपडेट हो जाएगा। किसान अपनी जमीन के अनुपात में सीमित मात्रा में खाद ले सकेगा। इससे उर्वरक की खपत भी कम होगी। कृषि विभाग प्रति एकड़ उर्वरक की मात्रा तय करके एंट्री करेगा।

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