जांजगीर-चांपा: जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अमोदा में 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मजदूर संतोष कुमार कर्ष की मौत हुए 15 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। गरीब परिवार के मुखिया की मौत के बाद भी कार्रवाई का पहिया न चलने से परिजनों में आक्रोश है और ग्रामीण प्रशासन-पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार हरदी निवासी संतोष कुमार कर्ष, 40 वर्ष, अमोदा में एक सरकारी शिक्षक के निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर रहा था। मकान के ठीक ऊपर से 11 केवी बिजली लाइन गुजर रही थी। काम के दौरान संतोष गलती से हाईवोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। मृतक के परिजनों का कहना है कि यह हादसा पूरी तरह लापरवाही का नतीजा है। जिस जगह निर्माण कार्य चल रहा था वहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। यदि निर्माण स्थल से हाईटेंशन लाइन को हटाने या आवश्यक सावधानी बरतने का इंतजाम किया गया होता तो संतोष की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के तुरंत बाद नवागढ़ पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी, लेकिन अब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी ने भी निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए थाना को पत्र भेजा है। इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
गांव में चर्चा है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि निर्माणाधीन मकान और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ को लेकर भी जांच की जरूरत है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतक संतोष के परिवार का कहना है कि वे बार-बार थाना के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक मजदूर की मौत के 15 दिन बाद भी यदि जांच प्रारंभिक चरण में है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी। यह सवाल अब केवल मृतक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोग पूछ रहे हैं।
नवागढ़ थाना प्रभारी मणिकांत पांडेय ने कहा कि एक पक्ष का बयान लिया जा चुका है। दोनों पक्षों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं जांच अधिकारी प्रेमलाल दिवाकर ने बताया कि उन्हें हाल ही में प्रकरण की डायरी प्राप्त हुई है और जांच जारी है। परिजनों और ग्रामीणों को अब इसी जांच के नतीजे और समय पर न्याय का इंतजार है।