जांजगीर चाम्पा के विकास पर रोक क्यों? विधायक ब्यास कश्यप का सरकार – प्रशासन पर हल्ला बोल…

जांजगीर-चांपा, 20 अप्रैल 2026।* जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने जिले में सीएसआर और डीएमएफ मद से विकास कार्यों की उपेक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन दोनों पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक ही दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को शिकायत पत्र भेजा और कलेक्टर को सत्याग्रह की सूचना दी।

*CM से शिकायत: मंत्री के आश्वासन के बाद भी काम नहीं*

विधायक कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेजे पत्र क्रमांक 1587/सी.एस.आर./2026 में लिखा कि 25 फरवरी 2026 को विधानसभा के बजट सत्र में तारांकित प्रश्न के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत संयंत्र के प्रभावित क्षेत्रों में उनके द्वारा अनुशंसित कार्यों की शीघ्र स्वीकृति का आश्वासन दिया था।

इसके बाद उन्होंने कलेक्टर के माध्यम से सभी तकनीकी दस्तावेज CSPDCL कार्यालय डगनिया, रायपुर भिजवाए। आरोप है कि विभागीय लापरवाही या मंत्री के निर्देश की अवहेलना कर उनके अनुशंसित एक भी कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी गई, जबकि अन्य कार्यों को स्वीकृति देकर राशि व्यय कर दी गई।

*कलेक्टर को चेतावनी: मई के पहले सप्ताह में धरना*

दूसरे पत्र में विधायक ने कलेक्टर जांजगीर-चांपा को सूचित किया कि दो वर्षों से जिले को सीएसआर, डीएमएफ और जनसंपर्क/स्वेच्छानुदान की राशि तुलनात्मक रूप से कम दी जा रही है या नहीं दी जा रही।

पत्र में कहा गया कि प्रदेश में विधायकों को 4 करोड़ की राशि विधान सभा क्षेत्र विकास निधि के रूप में मिलती है, जिसमें 2.96 करोड़ विधायक की अनुशंसा पर और शेष राशि प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर जारी होती है। आरोप है कि दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी 2.96 करोड़ के अलावा शेष राशि नहीं मिली।

*”2.96 करोड़ भी वापस ले लो”: विधायक का तल्ख लहजा*

विधायक ने लिखा कि यदि शेष राशि रोकी जा रही है तो 2.96 करोड़ की राशि भी शासन वापस ले ले। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की भेदभावपूर्ण कार्यवाही से जनता में घोर आक्रोश है।

*मई में कलेक्ट्रेट के सामने धरना*

विधायक कश्यप ने चेतावनी दी है कि मई माह के प्रथम सप्ताह में कलेक्ट्रेट कार्यालय गांधी प्रतिमा के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे, ताकि जनता सरकार की “तानाशाही पूर्ण कार्यवाही” से अवगत हो सके।

*विधानसभा की अवमानना का आरोप*

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक ने कहा कि इस कृत्य से प्रदेश की सवा तीन करोड़ जनता को संदेश गया है कि छत्तीसगढ़ में विधान सभा की कार्यवाही का कोई औचित्य नहीं है, मंत्री के वक्तव्य का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

 

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