जिले में 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट प्रतिबंधित.अपराध सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास अथवा 10 हजार रूपए का जुर्माना या दोनों एक साथ हो सकती है….

युगल राठौर (Fearlessnewsupdate)

जांजगीर-चांपा : 13 जून 2024 / छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्याखेट अधिनियम 1972 की धारा 3 की उपधारा दो के तहत 16 जून से 15 अगस्त तक क्लोज सीजन घोषित किया गया है। मछली पालन विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि क्लोज सीजन में मत्स्याखेट पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

मत्स्याखेट का अर्थ

मत्स्याखेट (Fishing) मछलियों को पकड़ने या उनका शिकार करने की क्रिया होती है। मछलियाँ महासागरों, सागरों, नदियों, झीलों व अन्य जलाशयों में पकड़ी जाती हैं। इन्हें हाथों, जालों, कांटो से और, बड़ी मछलियों के लिए, भाले जैसे हथियारों के प्रयोग से पकड़ा या मारा जाता है।ये सारे चीज प्रतिबंधित रहेंगे।

जिले के समस्त नदियों, नालों तथा छोटी नदियों, सहायक नदियों में जिन पर सिंचाई के तालाब, जलाशय (बड़े या छोटे) निर्मित किए गए हैं, उनमें किये जा रहे केज कल्चर के अतिरिक्त सभी प्रकार का मत्स्याखेट पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। यह प्रतिबंध छोटे तालाब या अन्य जल स्त्रोत जिनका संबंध किसी नदी नाले से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर में लागू नहीं होंगे। उल्लेखनीय है कि वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि (प्रजनन) को दृष्टिगत रखते हुए, उन्हें संरक्षण देेने के लिए राज्य में उक्त अवधि में क्लोज सीजन (बंद ऋतु) के रूप में घोषित किया गया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम – 3 (5) के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास अथवा 10 हजार रूपए का जुर्माना या दोनों एक साथ होने का प्रावधान है।

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