खबर प्रकाशन के बाद नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों की टूटी नींद, खराब जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने में लगा विभाग..

कोरबा। खबर प्रकाशन के बाद नागरिक आपूर्ति निगम के आला अफसरों की नींद टूट। खबर प्रकाशन के बाद नागरिक आपूर्ति निगम के आला अफसरों की नींद टूटी परंतु अभी भी वे खराब चावल खरीदी के जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने में लगे हुए है। यह खराब चावल की खरीदी का खेल नान के अधिकारियों का एक संगठित सुनियोजित अपराध है इसकी शुरुआत कोरबा जिले में तब से हुई जब खाद्य मंत्री के कथित निज सचिव संतोष अग्रवाल ने अपने ही बैच के एक ऐसे अधिकारी प्रमोद जांगड़े को कोरबा का जिला प्रबंधक बनवाया जिसका नियमितिकरण फर्जी भर्ती होने के कारण आज तक नहीं हुआ है और इसी वर्तमान कोरबा जिला प्रबंधक की विभागीय जांच आज दिनांक तक चल रही है। इसके बाद इन्होंने अपनी एक अन्य नजदीकी जिला प्रबंधक जो इस पूरे घटनाक्रम की मास्टरमाइंड है जिला बेमेतरा की जिला प्रबंधक अलका शुक्ला ने बिना किसी आदेश के अपने जिले के तकनीकी कर्मी महेश्वर लाल सोनवानी आई डी कोरबा स्थानान्तरित कर दी और महेश्वर लाल को स्वयं बेमेतरा में रोके रखा। इसमें मुख्यालय रायपुर के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नज़र आ रही है क्यूँकि कोरबा जिले में पदस्थ नियमित तकनीकी कर्मी से केवल एक लॉट पास कराया गया जबकि एक तकनीकी कर्मी एक दिन में अधिकतम 15 लॉट पास कर सकता है और सारे लॉट एक सेवा मुक्त प्लेसमेंट कर्मी प्रकाश बरेठ से महेश्वर लाल सोनवानी की आई डी से पास करवाए गए जो वहाँ उपस्थित ही नहीं था और यह सभी चावल निम्न गुणवत्ता का था जिसे पास करने की एवज में कोरबा और बेमेतरा जिला प्रबंधक ने मोटी रकम उगाही की है। यह पूरा घटनाक्रम एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गया क्युकी मामला सामान्य लगे इसलिये कुछ अन्य जिलों के तकनीकी कर्मियों की आई डी भी कोरबा स्थानांतरित कर दी गई थी जिनमे से एक 2 लॉट के पेपर बनाये गए थे। मामला जब उजागर हुआ तो लीपा पोती करते हुए नान मुख्यालय ने अपने 8 से अधिक अधिकारी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया परंतु इसमे अलका शुक्ला जिला प्रबंधक बेमेतरा का कहीं जिक्र भी नहीं है। इस प्रकरण में कई ऐसे तथ्य हैं जो एक बड़े भ्रष्टाचार की और इशारा कर रहे हैं –

1. एक अनियमित अधिकारी को जिसकी भर्ती ही फर्जी होने के कारण विभागीय जाँच चल रही है को खाद्य मंत्री के निज सचिव द्वारा कोरबा जिले का जिला प्रबंधक बनवाना।
2. अलका शुक्ला जिला प्रबंधक बेमेतरा द्वारा बिना किसी लिखित आदेश के महेश्वर लाल सोनवानी की आई डी बेमेतरा से कोरबा स्थाननातरित करना। इस
3. कोरबा में बिना उपस्थित हुए तकनीकी कर्मी के आई डी से पेपर बनता रहा और जिला प्रबंधक कोरबा की कान में जूं तक नहीं रेंगी।
4. मुख्यालय द्वारा खाना पूर्ति के लिए केवल कर्मचारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करना l
5. कोरबा के सैंपलों की जाँच fassi में करने भेजा जाना जबकि नागरिक आपूर्ति निगम के चावल खरीदी के मापदंड से पूर्णतः अलग है और इस जाँच में भी नान ने बेवजह 80 हजार से अधिक की राशि फूंक दी जबकि नियमानुसार इन सैंपल्स की जाँच भारत सरकार की केंद्रीय अनाज विश्लेषण प्रयोगशाला में करायी जानी थी जो की निःशुल्क होती है।

विधानसभा में उठेगा मामला

सूत्रो की माने तो यह मुद्दा आगामी विधान सभा में गर्माने की संभावना है साथ ही इस पूरे मामले की जाँच स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने पर कई अन्य अधिकारियों के नाम उजागर होने की भी संभावना है l

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