गंगासागर यात्रा में श्रद्धालुओं को नहीं मिला स्नान का अवसर, तीर्थयात्रा सेवा समिति की लापरवाही से यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी, श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी..

जांजगीर। त्रिपुर तीर्थयात्रा सेवा समिति द्वारा इस वर्ष आयोजित श्री जगन्नाथ धाम पुरी, द्वारका धाम और गंगासागर यात्रा श्रद्धालुओं के लिए अधूरी साबित हुई। समिति की ओर से आयोजित यह यात्रा चार बसों के माध्यम से शुरू की गई थी, जिसमें जिलेभर से लगभग ढाई सौ श्रद्धालु शामिल हुए थे। श्रद्धालुओं का उद्देश्य था कि वे मकर संक्रांति से पहले गंगासागर में स्नान व दर्शन कर पुण्य अर्जित करेंगे, लेकिन समिति की अव्यवस्था और असमंजस के कारण यात्रियों को यह पवित्र अवसर नहीं मिल सका। यात्रियों के अनुसार, यात्रा सुचारू रूप से आरंभ तो हुई, परंतु गंगासागर पहुँचने के समय समिति की लचर व्यवस्था के चलते यात्रियों को गंतव्य तक नहीं पहुँचाया गया। बताया गया कि सभी श्रद्धालु काकद्वीप (गंगासागर मार्ग) तक तो पहुँचे, लेकिन वहां से आगे जाने की अनुमति या सुविधा समिति की ओर से नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं को बिना स्नान किए ही लौटना पड़ा। श्रद्धालुओं ने बताया कि कई वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं लंबी यात्रा कर वहां तक पहुँची थीं। यात्रा का शुल्क समय पर जमा करने और सभी तैयारियां पूरी करने के बावजूद उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि अब स्नान संभव नहीं है। समिति के सदस्यों से जब स्पष्टीकरण मांगा गया, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस दौरान श्रद्धालुओं ने खाने-पीने, रहने और बस व्यवस्था में भी भारी अव्यवस्था की शिकायत की। कई यात्रियों का कहना था कि “हमें यात्रा का पूरा आनंद तो दूर, मूल उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पाया। जिन भावनाओं और आस्था से हम इस तीर्थ यात्रा पर निकले थे, वे अधूरी रह गईं। कुछ श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि समिति की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि यात्रा पूर्णतः नियमानुसार संपन्न होगी, लेकिन गंतव्य स्थल पर पहुँचने के बाद समिति के कुछ सदस्य बसें और व्यवस्थापक वहां से गायब हो गए। यात्रियों को स्वयं भोजन और ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ी। गंगासागर यात्रा का यह अनुभव श्रद्धालुओं के लिए निराशाजनक रहा। कई श्रद्धालुओं ने अब जिला प्रशासन और समिति के उच्च पदाधिकारियों से इस मामले की जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो। यात्रियों का कहना है कि तीर्थ यात्रा सेवा समिति जैसी धार्मिक यात्राओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा प्रदान करना होता है, लेकिन इस बार की यात्रा ने उस विश्वास को कमजोर कर दिया।

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